1 00:00:01,280 --> 00:00:06,870 प्रकाश को लपकना. 2 00:00:12,520 --> 00:00:14,350 आधी सदी से, 3 00:00:14,350 --> 00:00:19,500 यूरोपीयन सदर्न आब्जर्वेटरी ब्रह्मांड के सौंदर्य को उजागर करती रही है. 4 00:00:26,250 --> 00:00:28,340 पृथ्वी पर तारों के प्रकाश की वर्षा होती रहती है. 5 00:00:30,390 --> 00:00:33,070 विशाल दूरबीनें ब्रह्मांड के प्रकाश कण यानि फोटोन का संग्रह कर 6 00:00:33,070 --> 00:00:36,940 उन्हें अद्यतन कैमरों और वर्णक्रममापी उपकरणों को भेजती हैं. 7 00:00:40,090 --> 00:00:44,810 आज की खगोलीय छवियाँ 1960 के चित्रों से पर्याप्त भिन्न हैं. 8 00:00:46,020 --> 00:00:49,130 जब सन् 1962 में 'ईएसओ' की शुरुआत हुयी, 9 00:00:49,130 --> 00:00:53,110 खगोलशास्त्री काँच की बनी बड़ी बड़ी फोटोग्राफिक प्लेट का इस्तेमाल करते थे. 10 00:00:54,550 --> 00:00:58,730 वे कम सुग्राही और अशुद्ध होतीं और उनसे काम लेना भी कठिन होता था. 11 00:01:03,570 --> 00:01:07,220 आज के इलेक्ट्रोनिक संसूचकों ने दुनिया कितनी बदल दी है. 12 00:01:08,020 --> 00:01:10,500 वे लगभग प्रत्येक फोटोन को पकड़ लेते हैं. 13 00:01:11,020 --> 00:01:14,000 छवि भी तत्काल मिल जाती है. 14 00:01:14,000 --> 00:01:15,940 साथ ही महत्वपूर्ण बात ये भी है कि उसका 15 00:01:15,940 --> 00:01:19,920 कम्पूटर द्वारा संसाधन और विश्लेषण किया जा सकता है. 16 00:01:21,020 --> 00:01:24,690 खगोलशास्त्र पूरी तरह डिजिटल हो गया है. 17 00:01:31,550 --> 00:01:33,790 'ईएसओ' की दूरबीनों में दुनिया के सबसे बड़े 18 00:01:33,790 --> 00:01:36,460 और अति संवेदी संसूचक लगे हैं. 19 00:01:36,460 --> 00:01:43,460 अकेले 'विस्टा' कैमरे में 16 संसूचक लगे हैं जो 6 करोड 70 लाख पिक्सेल के बराबर है. 20 00:01:46,040 --> 00:01:50,810 यह विशाल उपकरण इन्फ्रारेड विकिरण को लपक लेता है जो ब्रह्माण्ड के धूल भरे बादलों से 21 00:01:50,810 --> 00:01:52,140 नवजात तारों से 22 00:01:52,140 --> 00:01:55,210 या दूरस्थ मंदाकिनियों से आ रहा हो. 23 00:02:02,530 --> 00:02:08,200 द्रवीभूत हीलियम इन संसूचकों को ऋण 269 के तापमान पर बनाये रखती है. 24 00:02:08,200 --> 00:02:11,950 इसप्रकार 'विस्टा' दक्षिण के आकाश की सूची तैयार करती है 25 00:02:11,950 --> 00:02:15,670 मानो कोई अन्वेषक किसी अनजाने महाद्वीप का नक्शा बना रहा हो. 26 00:02:18,480 --> 00:02:21,910 'वीएलटी' सर्वे दूरबीन एक और खोजी मशीन है 27 00:02:21,910 --> 00:02:24,650 जो दृश्य प्रकाश के क्षेत्र में काम करती है. 28 00:02:31,020 --> 00:02:34,670 इसका कैमरा जिसे 'ओमेगाकैम' कहा जाता है और भी बड़ा है. 29 00:02:34,670 --> 00:02:40,240 इसमें 32 सीसीडी के 26 करोड 80 लाख विलक्षण संख्या वाले पिक्सेल मिलकर 30 00:02:40,240 --> 00:02:45,100 अद्भुत चित्र बनाते हैं. 31 00:02:47,870 --> 00:02:50,930 इसका दृश्य फलक एक वर्ग अंश का है 32 00:02:50,930 --> 00:02:53,980 - यानि पूर्ण चन्द्र का चार गुना. 33 00:02:56,670 --> 00:03:01,220 'ओमेगाकैम' प्रतिरात पचास गीगाबाईट आंकड़े जमा करता है. 34 00:03:02,020 --> 00:03:05,530 ये तो हुए गीगाबाईट के उम्दा आंकड़े. 35 00:03:08,680 --> 00:03:11,810 'विस्टा' और 'वीएसटी' जैसी सर्वेक्षण दूरबीनें 36 00:03:11,810 --> 00:03:15,900 आकाश को खंगालती रहती हैं - दुर्लभ और रोचक पिंडों की तलाश में. 37 00:03:16,500 --> 00:03:19,850 खगोलशास्त्री फिर 'वीएलटी' की अपार क्षमता का उपयोग 38 00:03:19,850 --> 00:03:23,490 इन पिंडों के उत्कृष्ट अध्ययन के लिए करते हैं. 39 00:03:26,290 --> 00:03:28,380 'वीएलटी' की चारों दूरबीनों में से 40 00:03:28,380 --> 00:03:30,800 प्रत्येक का अपना विशिष्ट उपकरण है, 41 00:03:30,800 --> 00:03:33,800 प्रत्येक की अपनी विशेषताएं है. 42 00:03:35,000 --> 00:03:42,310 इन उपकरणों के बिना 'ईएसओ' के अंतरिक्ष पर लगी बड़ी आँख, बस, अंधी है. 43 00:03:43,349 --> 00:03:49,930 इनके बड़े विलक्षण नाम हैं जैसे, आइजेक, फ्लेम्स, हॉकआई और सिनफोनी. 44 00:03:50,880 --> 00:03:55,350 छोटी कार जितना आकार है इनमें से प्रत्येक विशाल अत्युन्नत मशीन का. 45 00:03:57,020 --> 00:03:58,520 इनका उद्देश्य? 46 00:03:58,520 --> 00:04:03,870 ब्रह्माण्ड के फोटॉनों को पकड़कर हर संभव सूचना बाहर निकलना. 47 00:04:06,020 --> 00:04:10,630 सभी उपकरण विलक्षण हें पर कुछ दूसरों से अधिक विशिष्ट. 48 00:04:10,630 --> 00:04:17,370 उदाहरण के लिए, ये नाको और ये सिनफोनी 'वीएलटी' की एडेप्टिव ऑप्टिक्स का उपयोग करते हैं. 49 00:04:20,520 --> 00:04:23,450 लेज़र के द्वारा कृत्रिम तारे बनाये जाते हैं. 50 00:04:23,450 --> 00:04:27,220 जो वायुमंडल के धुंधलापन लाने वाले प्रभाव को निष्क्रिय करने में खगोलविदों की मदद करते हैं. 51 00:04:33,850 --> 00:04:38,250 नाको द्वारा लिए चित्र इतने स्पष्ट होते हैं मानों उन्हें बाह्य अंतरिक्ष से लिया गया हो. 52 00:04:41,020 --> 00:04:46,720 फिर मिडी और एम्बर नामक दो व्यतिकरणमापी हैं. 53 00:04:47,520 --> 00:04:52,330 इनमें दो या दो से अधिक दूरबीनों की प्रकाश तरंगें एक स्थान पर लाई जाती हैं 54 00:04:52,330 --> 00:04:55,880 मानो उन्हें किसी एक विशाल दर्पण द्वारा एकत्र किया गया हो. 55 00:04:58,520 --> 00:04:59,520 परिणाम: 56 00:05:00,280 --> 00:05:02,410 कल्पनातीत प्रखर चित्र. 57 00:05:06,520 --> 00:05:09,390 पर खगोलशास्त्र में केवल चित्र ही लिए जाते हों ऐसा नहीं है. 58 00:05:09,390 --> 00:05:11,080 अगर आप विस्तृत सूचना चाहते हैं, 59 00:05:11,080 --> 00:05:15,290 तो आप तारे के प्रकाश के साथ चीरफाड़ कर उसकी संरचना ज्ञात कर सकते है. 60 00:05:18,340 --> 00:05:22,050 वर्णक्रममिति खगोलशास्त्र का एक सशक्त औज़ार है. 61 00:05:27,840 --> 00:05:31,780 आश्चर्य नहीं कि 'ईएसओ' को अपने दुनिया के सबसे अत्याधुनिक वर्णक्रममापियों पर गर्व है. 62 00:05:31,780 --> 00:05:34,240 जैसे ये शक्तिशाली 'एक्स-शूटर'. 63 00:05:35,420 --> 00:05:40,430 जहाँ चित्र हमें सौंदर्य के दर्शन करते हैं वहीँ वर्णक्रम अधिक जानकारी उजागर करता है. 64 00:05:44,270 --> 00:05:45,520 सर्जन 65 00:05:46,520 --> 00:05:47,780 गति 66 00:05:48,770 --> 00:05:50,060 आयु 67 00:05:56,270 --> 00:06:01,010 दूरवर्ती तारों के गिर्द घूमते बाह्य ग्रहों के वायुमंडल. 68 00:06:04,550 --> 00:06:08,890 या दृश्य ब्रह्मांड के छोर पर स्थित नवजात मंदाकिनियाँ. 69 00:06:12,350 --> 00:06:17,530 बिना वर्णक्रममिति के हम ऐसे अन्वेषक साबित होते जो बस एक विशाल भूदृश्य मात्र ताक रहे होते. 70 00:06:17,530 --> 00:06:18,980 वर्णक्रममिति के द्वारा 71 00:06:18,980 --> 00:06:24,570 हम उस भूदृश्य की स्थलाकृति, भूविज्ञान, विकास एवं संरचना को जान सकते हैं. 72 00:06:34,260 --> 00:06:36,080 एक बात और है. 73 00:06:40,060 --> 00:06:44,930 अपने शांत और स्थिर सौंदर्य के बावजूद ब्रह्माण्ड एक अत्यंत हिंसापूर्ण स्थली है. 74 00:06:47,010 --> 00:06:48,700 रात में कई जगह ऊपर धमाके होते हैं, 75 00:06:48,700 --> 00:06:52,680 और खगोलविद प्रत्येक घटना को लपक लेना चाहते हैं. 76 00:06:56,020 --> 00:07:01,300 भारी तारे अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा के रूप में विस्फोटित होते हैं. 77 00:07:07,580 --> 00:07:10,470 कुछ ब्रह्मांडीय धमाके तो इतने प्रचंड होते हैं कि 78 00:07:10,470 --> 00:07:13,640 वो अपनी पितृ मंदाकिनी को कुछ समय के लिए चमक में पीछे छोड़ देते हैं. 79 00:07:13,640 --> 00:07:19,320 अन्तःतारकीय अंतरिक्ष उच्च शक्ति वाली अदृश्य गामा किरणों से ओतप्रोत हो जाता है. 80 00:07:21,320 --> 00:07:26,980 छोटी-छोटी स्वचालित दूरबीनें उपग्रहों द्वारा इसका संकेत मिलते ही सक्रिय हो जाती हैं. 81 00:07:26,980 --> 00:07:34,010 कुछ ही सेकिंडों में वे सही दिशा में समायोजित हो जाती हैं ताकि विस्फोट के परिणाम का अध्ययन कर सकें. 82 00:07:35,180 --> 00:07:38,680 दूसरी स्वचालित दूरबीनें अपना ध्यान कम नाटकीय घटनाओं पर केंद्रित करती हैं. 83 00:07:38,680 --> 00:07:43,510 जैसे दूरवर्ती ग्रहों का अपने मातृ तारे के सामने से गुज़रना. 84 00:07:46,260 --> 00:07:49,170 ब्रह्माण्ड में हरदम हलचल मची रहती है. 85 00:07:49,170 --> 00:07:52,690 'ईएसओ' की चेष्टा यही है कि इस हलचल के एक भी स्पंदन से चूक न जाय. 86 00:07:55,020 --> 00:07:58,900 ब्रह्माण्डिकी ऐसा विज्ञान है जिसमें ब्रह्माण्ड का उसकी पूर्णता में अध्ययन किया जाता है. 87 00:07:58,900 --> 00:08:03,110 इसकी संरचना, विकास और उद्भव. 88 00:08:07,020 --> 00:08:11,820 इसलिए ये महत्वपूर्ण हो जाता है कि हम अधिक से अधिक प्रकाश का संग्रह कर सकें. 89 00:08:11,820 --> 00:08:17,880 ये मंदाकिनियाँ इतनी दूर हैं कि इनसे केवल गिने चुने फोटॉन ही पृथ्वी तक पँहुचते हैं. 90 00:08:20,020 --> 00:08:23,510 पर ये गिने चुने फोटॉन अपने में ब्रह्माण्ड के अतीत के सुराग संजोये होते हैं. 91 00:08:25,320 --> 00:08:27,770 उन्होंने अरबों वर्षों की यात्रा की होती है. 92 00:08:27,770 --> 00:08:31,470 वे हमें आदि ब्रह्मांड का स्वरूप दिखाते हैं. 93 00:08:32,020 --> 00:08:37,150 इसीलिये सुग्राही उपकरणों से सुसज्जित बड़ी दूरबीनें ज़रूरी हो गयी हैं. 94 00:08:37,950 --> 00:08:40,070 पिछले पचास वर्षों में, 95 00:08:40,070 --> 00:08:44,520 'ईएसओ' की दूरबीनों ने बहुत दूर की मंदाकिनियों और क्वेजार्स के दर्शन कराये 96 00:08:44,520 --> 00:08:46,580 जैसे हमने पहले कभी नहीं किये थे. 97 00:08:50,020 --> 00:08:53,980 यहाँ तक कि उन्होंने हमारी मदद अदृश्य काले पदार्थ के प्रसार को अनावृत करने में की 98 00:08:53,980 --> 00:08:56,970 जिसकी प्रकृति अबतक अनजानी है. 99 00:09:03,580 --> 00:09:09,790 कौन जानता है कि अगले पचास वर्षों में क्या गुल खिलेंगे?