1 00:00:02,080 --> 00:00:06,000 जीवन की खोज. 2 00:00:08,500 --> 00:00:11,470 क्या आपने कभी ब्रह्माण्ड में जीवन के बारे में सोचा है? 3 00:00:11,470 --> 00:00:14,600 दूरवर्ती तारों के गिर्द जीव सृष्टि से ओतप्रोत ग्रह? 4 00:00:14,600 --> 00:00:17,500 सदियों से खगोलशास्त्री इस विषय पर चिंतन करते रहे हैं. 5 00:00:17,500 --> 00:00:21,950 आखिर ब्रह्माण्ड में इतनी सारी मंदाकिनियाँ बिखरी पड़ी हैं और प्रत्येक में ढेर सारे तारे हैं 6 00:00:21,950 --> 00:00:24,140 तो फिर पृथ्वी ही विशिष्ट क्यों? 7 00:00:25,500 --> 00:00:30,110 सन् 1995 में स्विस खगोलशास्त्री माइकेल मेयर और डिडियर क्विलोज़ 8 00:00:30,110 --> 00:00:34,660 वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने हमरे सौर मण्डल के बाहर एक सामान्य तारे की परिक्रमारत ग्रह को खोजा. 9 00:00:35,000 --> 00:00:39,490 तबसे ग्रह-खोजियों ने सैकड़ों दूसरे बाह्य ग्रह खोज निकाले हैं. 10 00:00:39,490 --> 00:00:44,780 छोटे-बड़े, गर्म-ठंडे विविध प्रकार के ग्रह. 11 00:00:45,600 --> 00:00:49,800 अब हम पृथ्वी जैसे ग्रहों को बस खोजने ही वाले हैं. 12 00:00:50,290 --> 00:00:56,290 और फिर भविष्य में: ऐसा ग्रह जिसपर जीवन हो - खगोलशास्त्रियों की मृगतृष्णा. 13 00:01:02,590 --> 00:01:06,070 यूरोपीयन सदर्न आब्जर्वेटरी बाह्य ग्रहों की खोज में 14 00:01:06,070 --> 00:01:08,310 प्रमुख भूमिका निभाती है. 15 00:01:09,290 --> 00:01:13,560 माइकेल मेयर के दल ने सेरो ला सिला से सैकड़ों बाह्य ग्रह खोज निकले हैं. 16 00:01:13,560 --> 00:01:16,880 यह स्थान चिली में हमारा प्रथम चरण था. 17 00:01:17,890 --> 00:01:19,880 यहाँ ये कोराली वर्णक्रममापी है, 18 00:01:19,880 --> 00:01:23,120 जो स्विस लियोंहार्ड आयलर दूरबीन पर लगा है. 19 00:01:25,030 --> 00:01:30,940 इसका काम है तारों में हलकी सी लड़खड़ाहट को मापना जो उनके गिर्द घूमते ग्रहों की गतियों के गुरुत्व के कारण उत्पन्न होती है. 20 00:01:30,940 --> 00:01:37,910 'ईएसओ' की सम्मान्य 3.6 मीटर व्यास की दूरबीन भी इस कार्य में सन्नद्ध है. 21 00:01:39,200 --> 00:01:42,320 इसका हार्प्स वर्णक्रममापी दुनिया भर में सबसे अधिक अचूक है. 22 00:01:42,320 --> 00:01:46,680 इसने अबतक 150 से अधिक ग्रह खोजे हैं. 23 00:01:51,750 --> 00:01:53,360 इसका सबसे बड़ा विजय चिन्ह है 24 00:01:53,360 --> 00:01:59,950 ये पांच से सात बाह्य ग्रहों का समृद्ध 'सौर मंडल'. 25 00:02:11,330 --> 00:02:13,960 पर बाह्य ग्रहों को खोजने के दूसरे तरीके भी हैं 26 00:02:22,130 --> 00:02:28,350 जैसे 1.5 मीटर व्यास की इस डेनिश दूरबीन ने एक दूरवर्ती ग्रह खोजा 27 00:02:28,350 --> 00:02:31,350 वो ग्रह पृथ्वी से पांच गुना वजनी निकला. 28 00:02:35,500 --> 00:02:39,200 कैसे इसे खोजा गया? गुरुत्वीय माइक्रोलेंसिंग के द्वारा. 29 00:02:40,040 --> 00:02:45,150 हुआ यह कि वो ग्रह अपने पितृ तारे के के साथ पृष्ठभूमि के एक बड़े चमकीले तारे के सामने से गुज़रा. 30 00:02:45,150 --> 00:02:47,320 इससे वो आवर्धित हो दिखाई दिया. 31 00:02:49,420 --> 00:02:54,660 कभी कभी तो आप सीधे अपने कैमरे में बाह्य ग्रह को कैद कर सकते हैं. 32 00:02:57,960 --> 00:03:04,240 जैसे, 'वीएलटी' पर लगे 'नाको' नामक एडेप्टिव ऑप्टिक्स वाले कैमरे ने 33 00:03:04,240 --> 00:03:08,220 किसी बाह्य ग्रह की पहली तस्वीर आँकी. 34 00:03:08,220 --> 00:03:14,020 इस चित्र में ये लाल धब्बा एक विशाल ग्रह है जो एक भूरे वामन तारे की परिक्रमा कर रहा है. 35 00:03:17,880 --> 00:03:22,650 वर्ष 2010 में 'नाको' ने एक कदम और आगे बढ़ा. 36 00:03:24,440 --> 00:03:28,330 ये तारा पृथ्वी से 130 प्रकाश वर्ष दूर है. 37 00:03:28,330 --> 00:03:35,080 ये सूर्य से कम उमरदार और चमकीला है, इसके गिर्द चार ग्रह बड़ी कक्षाओं में घूमते हैं, 38 00:03:36,900 --> 00:03:41,970 'नाको' की गिद्ध जैसी पैनी आँख ने इस ग्रह 'स' के प्रकाश को मापा, 39 00:03:41,970 --> 00:03:46,490 यह एक गैसों का बना गुरु से भी दस गुना भारी है, 40 00:03:48,070 --> 00:03:50,450 पितृ तारे के प्रकाश की कौंध के बावजूद 41 00:03:50,450 --> 00:03:54,450 ग्रह के मंद प्रकाश को वर्णक्रम में फैलाना संभव हुआ. 42 00:03:54,450 --> 00:03:57,380 इससे ग्रह के वातावरण के बारे में जानकारी मिली. 43 00:03:59,270 --> 00:04:05,740 आज अधिकांश बाह्य ग्रह उस समय खोजे जाते हैं जब वे अपने पितृ तारे के सामने से गुजरते हैं. 44 00:04:05,740 --> 00:04:09,020 यदि हमारे लिए ग्रह का कक्षातल दृष्टि रेखा पर हो 45 00:04:09,020 --> 00:04:12,390 तो हमें बार बार यह घटना देखने को मिलेगी. 46 00:04:12,390 --> 00:04:16,870 इस प्रकार तारे की चमक में हो रहा बहुत थोड़ा आवर्ती ह्रास 47 00:04:16,870 --> 00:04:20,310 ग्रह की उपस्थिति का भेद खोल देता है. 48 00:04:23,010 --> 00:04:27,600 ला सिल्ला की ट्रापिस्ट दूरबीन इन दुष्प्राप्य संक्रमणों की खोज करेगी. 49 00:04:28,250 --> 00:04:29,570 इसी बीच, 50 00:04:29,570 --> 00:04:36,120 'वीएलटी' ने एक संक्रमण करते ग्रह का अध्ययन बड़ी सूक्ष्मता से किया. 51 00:04:36,910 --> 00:04:44,820 मिलिए GJ1214b से, हमारी अपनी पृथ्वी से 2.6 गुना भारी ग्रह. 52 00:04:47,010 --> 00:04:53,040 संक्रमण के समय ग्रह का वायुमंडल पितृ तारे के प्रकाश का आंशिक अवशोषण करता है. 53 00:04:57,200 --> 00:05:02,740 'ईएसओ' के सुग्राही फौर्स नामक वर्णक्रममापी ने यह पता चलाया था कि 54 00:05:02,740 --> 00:05:07,000 यह ग्रह गर्म और वाष्प से भरे 'सौना' जैसा है. 55 00:05:09,920 --> 00:05:14,060 गैस के बने दैत्याकार ग्रह और इस ग्रह जैसे 'सौना' जगत जीवन के लिए प्रतिकूल हैं. 56 00:05:14,060 --> 00:05:17,060 पर हमारी खोज जारी है. 57 00:05:18,010 --> 00:05:22,420 शीघ्र ही 'वीएलटी' पर एक नया 'स्फीयर' नामक उपकरण लगाया जाने वाला है. 58 00:05:22,420 --> 00:05:28,490 'स्फीयर' में मंद प्रकाश वाले ग्रहों को अपने पितृ तारों की कौंध में ढूंढ लेने की क्षमता होगी. 59 00:05:29,200 --> 00:05:35,140 वर्ष 2016 में एस्प्रेस्सो नामक वर्णक्रममापी 'वीएलटी' में आ जुड़ेगा. 60 00:05:35,140 --> 00:05:39,110 ये हार्प्स नामक उपकरण को भी मात दे देगा. 61 00:05:41,000 --> 00:05:44,850 और जब 'ईएसओ' की अत्यधिक बड़ी दूरबीन तैयार हो जायेगी, 62 00:05:44,850 --> 00:05:49,170 तब हम शायद धरती के परे के अन्य जीवमंडलों के चिन्ह खोज पायें. 63 00:05:56,480 --> 00:05:59,390 पृथ्वी पर जीवन प्रचुर मात्रा में है. 64 00:06:00,960 --> 00:06:09,640 उत्तरी चिली को कुदरत ने गिद्ध, विकुना नामक ऊँट, विज्काचास नामक खरगोश जैसे चूहे और विशाल कैक्टस के पौधे दिए हैं. 65 00:06:11,910 --> 00:06:16,830 यहाँ तक कि अटाकामा मरुस्थल की शुष्क धरती भी बड़े दमदार जीवाणुओं से ओतप्रोत है. 66 00:06:20,970 --> 00:06:25,300 हमने अन्तःतारकीय जगत में जीवन के मूल घटक खोज निकले हैं. 67 00:06:26,000 --> 00:06:28,790 हमने ये भी जान लिया है कि ढेर सारे ग्रह उपस्थित हैं. 68 00:06:33,110 --> 00:06:38,190 अरबों वर्ष पूर्व धूमकेतुओं पृथ्वी पर पानी और जैविक अणु लेकर आये थे. 69 00:06:40,540 --> 00:06:44,250 क्या ऐसा अन्यत्र होने की सम्भावना नहीं है? 70 00:06:49,500 --> 00:06:51,400 अथवा, क्या हम ब्रह्माण्ड में नितांत अकेले हैं? 71 00:06:53,040 --> 00:06:55,080 ये एक बहुत पुराना और बड़ा प्रश्न है. 72 00:06:56,480 --> 00:06:59,530 और इसका उत्तर बस हमारी मुट्ठी में आने ही वाला है.